रविवार, 4 जनवरी 2009
अगर आप लोकतंत्र में, सरकारी गुंडई का खौफ देखना चाहते हैं तो उत्तर प्रदेश आइये जन्मदिन के चंदे के नाम पर एक ईमानदार अभियंता की हत्या से सिहर रहे प्रदेश में शर्म भी आज शर्मसार हो रही है मैडम मायावती के जन्मदिन ने अधिकारियों की नींदें तो उड़ा ही दी हैं,व्यवसायी और आम आदमी भी त्राहि त्राहि कर रहा है भारत के इतिहास में किसी राजनेता की ऐसी अंधेरगर्दी फ़िर कभी देखने को शायद ही मिले यह लोकतंत्र के मुँह पर तमाचे की तरह है और राज्य समर्थित भ्रष्टाचार का अब तक का सबसे बड़ा उदाहरण है
इस चंदे की वसूली के पीछे मुख्यमंत्री जो भी तर्क दें लेकिन ये सच है की वे लूटो और सबमे बाटों की निति को अंजाम दे रही है आलम ये है की मैडम का केक कटवाने को आतुर बसपा के विधायक एवं सांसद भी खुलेआम, बहती गंगा में अपना हाँथ धो रहे हैं ख़बर है की विगत २६ दिसंबर तक राज्य भर से लगभग ८ करोड़ रुपये की पहली किस्त बतौर नजराना प्रस्तुत कर दी गई है वहीँ बाकी के पैसे के लिए प्रशासनिक अधिकारीयों,व्यापारियों के घरों के दरवाजे की कुण्डी लगातार खटखटायी जाई रही है धमकी ये है की रोजी रोटी कमानी है तो जन्मदिन मनाओ नाम न छापने की शर्त पर एकप्रसाशनिक अधिकारी कहते हैं 'हमसे इस तरह पैसे की मांग की जाती है जैसे हमने कोई अपराध करके धन जमा रखा हो ,अपमानित होने से बेहतर है,हम लम्बी छुटी लेकर घर बैठ जाए
किसी भी लोकतंत्र के लिए इससे शर्मनाक क्या होगा की जिस के हांथों में सत्ता की बागडोर हो वही खुलेआम वसूली का कारखाना खोल दे देश की राजनीति की दिशा तय करने वाला राज्य और उसकी जनता आज कराह रही है जाति,धर्म की राजनीति के दम पर सिंहासन पर काबिज होने की कोशिश करने वाले भाजपा और कांग्रेस के तिकड़म का प्रत्युतर समझे जाने वाली मायावती इस कदर मतान्ध हो जाएँगी ,ये किसी ने नही सोचा था चंदा वसूली के इस व्यापक अभियान की खबरें भी पटरियों पर पिछली पंक्तियों में रखे जाने वाले कुछ एक अखबारों ने प्रकाशित की और बाकी राज्य सरकार के चेहरे पर कालिख पोत रही इस ख़बर को सीधा निगल गए ,अभियंता की हत्या के बाद सिर्फ़ तथ्य प्रकाशित किए गए सच नही तथ्य भी वो जो मुख्यमंत्री मायावती और उनका पिट्ठू कैबिनेट सचिव सशंक शेह्खर पत्रकारों को पत्रकारवार्ता में ललकारते हुए बता रहे थे जबकि सभी जानते हैं की मुख्यमंत्री के जन्मदिन के नाम पर पूरे प्रदेश में अधिकारियों और व्यवसायिओं से अरबों रुपये की चंदा वसूली होती है मुख्यमंत्री के जन्मदिन के चंदे की वसूली के इस सारे खेल में पुलिस ,वसूली टीम के साथ कंधे से कन्धा मिला कर सहयोग कर रही है प्रत्येक थाने में चंदे की रकम तो पहले ही तय कर दी गई थी ,इसके अलावा प्रदेश में पुलिस के तमाम अधिकारी ,व्यवसाइयों पर दबाव बनने का काम कर रहे हैं सच तो यह है की पुलिस की हिटलिस्ट में शामिल तमाम माफियाओं को जिनमे मुख्तार अंसारी और अतीक अहमद भी शामिल है ,चंदे की भारी रकम लेकर कला कारोबार करने की खुली छूट दे दी गई है चंदे की इस वसूली को पूरी तरह से जायज बताते हुए ख़ुद मुख्यमंत्री कहती हैं की सभी लोग स्वेच्छा से चंदा दे रहे हैं हमारे लोग किसी को को भी रहे हैं लेकिन जमीनी हकीकत ये है की चंदे की रकम न देने की स्थिति में अधिकारियों को पवेलियन वापस भेज देने की खुली धमकी दी गई है जन्मदिन के चंदे के लिए प्रदेश को चरने की यह कवायत बेहद खतरनाक है ,यह उत्तर प्रदेश का दुर्भाग्य है की जिनके हाथों में सत्ता की बागडोर है ,वही चंदे के नाम पर भ्रष्टाचार और अपराध का पौधा लगा रहे हैं
शुक्रवार, 2 जनवरी 2009
राम नाम सत्य है
यह शर्म से मुँह ढकने का वक्त है पत्रकारिता के नैतिक दायित्वों का सरेआम सरेआम कत्ल करके उसे बाजार में नंगा लटका दिया गया है देश के एक बड़े उद्योगपति घराने की बपौती में चल रहे व राष्ट्र का नाम बेच रहे एक अखबार ने माफियाओं के साथ अपने रिश्ते की खुले आम नुमाइश लगनी शुरू कर दी है अखबार ने अपने २ जनवरी के अंक में कुख्यात माफिया डॉन बृजेश सिंह के एक का तस्वीर सहित शुभकामना संदेश प्रकाशित किया है इसके पहले भी कई बार ब्रिजेश सिंह उर्फ़ अरुण कुमार सिंह ,प्रदेश की जनता को अपनी बधाइयाँ दे चुके हैं ये कुछ ऐसा है कि अगर आज अब्दुल कसाब ,दाउद इब्राहीम या फ़िर अबू सलेम कुछ पैसे खर्च कर दे तो अखबार उन्हें हीरो बनाकर ससस्मान आपके सामने प्रस्तुत कर देगायह सिर्फ़ शुभकामना संदेश नही है बल्कि मीडिया और माफियाओं के नव गठजोड़ का एक काला सच है साथ ही उन जुबानों को काट देने का शगल है ,जो अराजकता की स्थिति से उब चुकी थी और अखबारों को तलवार की धार की तरह इस्तेमाल कर हल्ला बोल रही थी
आतंकवाद की आग में झुलस कर राख हो रहे भारतवर्ष में अगर आप राजनीति से उब चुके हैं और मीडिया से परिवर्तन लाने की उम्मीद कर रहे हैं तो फिलहाल ये विचार त्याग दीजिये वो आपकी उम्मीदों के साथ बलात्कार करेंगे और उसे विज्ञापन में तब्दील कर देंगेअब तक नेताओं और अपराधियों की मिलीभगत को लेकर हो हल्ला मचाने वाला एक अखबार यह काम बिना किसी शर्म के अंजाम दे रहा है उक्त मीडिया हाउस ने ब्रिजेश सिंह को बसपा के टिकेट पर लोकसभा चुनाव लड़ाने की जिम्मेदारी अपने ऊपर ले ली है ख़बर है की यह सौदा करोडो में हुआ है समाचार पत्र ने पूर्वांचल के अपने सभी संवाददाताओं को माफिया डॉन की पर्सनालिटी मेकिंग का काम सोंप दिया है यह वही अखबार है जिसने अपने मालिक के निधन पर पहले उनकी ग़लत तस्वीर प्रकाशित की अवाम पार्टी कर उस दिन जम कर दारूबाजी की जब इस सम्बन्ध में वेब पत्रकार सुशील कुमार सिंह ने अपनी वेबसाइट गॉसिप अड्डा डॉट कॉम पर ख़बर प्रकाशित की तो उनके ख़िलाफ़ प्रदेश सरकार की मिलीभगत से फर्जी मुकदमा दर्ज करा दिया गया अब आप ख़ुद अंदाजा लगाइए जिसे अपनी मालिक की मौत का शोक न हो वो अपराधियों से त्राहि-त्राहि कर रही देश की जनता के शोक पर क्यूँ कर संताप करेगी
माफिया डॉन के शुभकामना संदेश को जिन अखबारों ने प्रकाशित नही किया वे धन्यवाद के पात्र हैं लेकिन दुखद ये है कि वे भी अपने बीच पनप रही इस अपसंस्कृति का विरोध करने का साहस नही करते ,इसकी भी अपनी वजह है नाम न छापने कि शर्त पर एक बड़े अखबार के विज्ञापन प्रबंधक कहते हैं 'माफिया डॉन के लोगों ने कई जनपदों से हम पर यह शुभकामना संदेश प्रकाशित करने का दबाव बनाया था व इसके लिए हमें निर्धारित दरों से काफ़ी अधिक भुगतान भी दिया जा रहा था ,लेकिन हमने इसे नही छापा क्यूंकि हमारी जनता के प्रति भी जवाबदेही है एवं मूल्यों से समझौता नही किया जा सकता वो कहते हैं लेकिन हम किसी अखबार को ऐसा विज्ञापन प्रकाशित करने पर कटघरे मे खड़ा नही कर सकते'
देश कि एक नामचीन लेखिका के संपादन में चलाये जा रहे इस समाचारपत्र से आत्म्मुल्यांकन कि उम्मीद तो फिलहाल नही है ,क्यूंकि अब तक सत्ताधारी दलों कि सरपरस्ती में अखबार चलने कि उनकी व्यावसायिक अनिवार्यता के दायर में अब माफिया भी शामिल हो गए हैं वो दिन दूर नही जब माफिया ही अखबार चलाएंगे और ख़बरों का चुनाव करेंगे,अगर आप अपना माथा पीटना चाहते हैं तो पीटे पर अब चुप रहने की आदत डाल लीजिये